गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस, हर व्यक्ति के दिल के अंदर देशभक्ति की भावना और बच्चपन की यादें मन को ताजा कर देता है। २ मिनट के लिए ही सही, हर व्यक्ति अपने बच्चपन के कुछ पल खुशिया और उमंग के साथ अपने-अपने दोस्तों के साथ गाँव के छोटे स्कूल में गुजारे हैं। आज भी भारत के गांवों में राष्ट्रीय पर्व में बच्चों के अंदर काफी खुशियाँ होता है। बच्चें पर्व की तेयारी दो-तीन दिन पहले से शुरू करने लगता है। बच्चे की इस तेयारी में समाज के बड़े-बूढ़े भी उसका साथ देते है। स्कूल के शिक्षक अपने सभी विधायार्तियो को अलग-अलग कामों की तेयारी में लगा देता है। ये पर्व स्कूल शिक्षा का बहुत बड़ा त्यौहार होता है। शायद, हमारे शिक्षा का बहुत बड़ा सम्बन्ध इस त्यौहार से होता है। जहाँ पर बच्चे अपने देश की सेवा और सुरक्षा के विषय पर ज्ञान प्राप्त करता है। जिसमे हमारे देश के महान देशभक्त स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में बताते है। उनलोगों ने भारत को आजाद कराने में किस तरह से सहयोग और अपना बलिदान भी दिया। जिनके वजह से आज हमलोग आजाद भारत में रह रहें। हमलोगों आज भी अपने देश की लिए होसला बुलंद है। गणतंत्र दिवस पर राष्ट्र को सलाम!
गणतंत्र दिवस- हमारा बच्चपन, स्कूल, गाँव और यादें
गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस, हर व्यक्ति के दिल के अंदर देशभक्ति की भावना और बच्चपन की यादें मन को ताजा कर देता है। २ मिनट के लिए ही सही, हर व्यक्ति अपने बच्चपन के कुछ पल खुशिया और उमंग के साथ अपने-अपने दोस्तों के साथ गाँव के छोटे स्कूल में गुजारे हैं। आज भी भारत के गांवों में राष्ट्रीय पर्व में बच्चों के अंदर काफी खुशियाँ होता है। बच्चें पर्व की तेयारी दो-तीन दिन पहले से शुरू करने लगता है। बच्चे की इस तेयारी में समाज के बड़े-बूढ़े भी उसका साथ देते है। स्कूल के शिक्षक अपने सभी विधायार्तियो को अलग-अलग कामों की तेयारी में लगा देता है। ये पर्व स्कूल शिक्षा का बहुत बड़ा त्यौहार होता है। शायद, हमारे शिक्षा का बहुत बड़ा सम्बन्ध इस त्यौहार से होता है। जहाँ पर बच्चे अपने देश की सेवा और सुरक्षा के विषय पर ज्ञान प्राप्त करता है। जिसमे हमारे देश के महान देशभक्त स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में बताते है। उनलोगों ने भारत को आजाद कराने में किस तरह से सहयोग और अपना बलिदान भी दिया। जिनके वजह से आज हमलोग आजाद भारत में रह रहें। हमलोगों आज भी अपने देश की लिए होसला बुलंद है। मजबूत इरादा, बड़ा निर्माण और यूपी। सुश्री मायावती
कभी-कभी कुछ काम बड़े-बड़े लोग नहीं कर पाता। लेकिन कुछ ऐसे लोग होते है। जिसको हमलोग साधारण समझकर छोड़ देते है। लेकिन वही साधारण लोग ऐसा काम कर देता है। जिसे बड़े-बड़े लोग सोंच भी नहीं पाते है। वह साधारण व्यक्ति अपनी महानता की छाप समाज और देश के लोगों में बना लेता है। लेकिन कुछ लोग कुछ लोग उस व्यक्ति का महानता साबित हो जाने के बाद भी उसको स्वीकार नहीं करता है। वे लोग अपनी बडप्पन को साबित करने के लिए समाज के लोगों में उस महान व्यक्ति को दागदार करने की पूरी कोशिश करते रहते है। इसे व्यक्ति न कुछ करते है, न कुछ करने देते है। ये लोग सिर्फ अपने आपको सुपर या दुसरे देशो के मोहताज और उसका पिछलग्गू करता रहता है। अगर हमारे देश के लोगों में कुछ करने का ताक़त और होसला है तो हम दुसरे देशों पर मोहताज क्यों?नीतीश जी का सेवा यात्रा। कस्बा, गाँव और लोग।

चाय की दूकान सूचना का बड़ा माध्यम होता है।

भारत के ग्रामीण समाज में चोक-चोराहे और चाय की दूकान समाज के लिए काफी महत्व रखता है। क्योंकि यहाँ हर रोज ग्रामीण समाज के लोग इकट्ठा होता है। जिसमे समाज के बड़े-छोटे सभी समुदाय के लोग होते है। वैसे तो गाँव में हर घर में लगभग चाय बनती है। लेकिन चोक-चोराहे की दूकान में चाय पीने में समाजिक स्वाद मिलता है। जिसमे अधिक मात्रा राजनीती और समाजिक व्यवहारों का होता है।
यहाँ समाज के लोग सुबह और शाम को चाय दूकान में काफी लोग इकट्ठा होता है। लेकिन सुबह की चाय में काफी ताजगी होता है। सुबह 4 बजे से 8 बजे तक, यहाँ पर लोग अपने समाज से लेकर देश-दुनिया तक की बाते करते है। जिसमे राजनीती के विषय के उपर चर्चा अधिक होती है। ये लोग देश के कोई भी मंत्री या पार्टी के बारे में गलत समाचार सुनता है तो उसको भला-बुरा कहने में भी कोई हिचक नहीं होता है। ये लोग उसका जवाब आने वाले चुनाव में दे देता है। ऐसा मालूम होता है की यही लोग देश को चलता है। और ये बात सही भी है। क्योंकि भारत गाँवों का देश है। ग्रामीण समाज समाचार-पत्र पहुचने में समय लग जाता है। लगभग 12 बजे से लेकर 2 बजे दिन तक लोगों के हाथों में पहुँचता है। एक गाँव में लगभग 10-15 लोगों के घर में पहुचता होगा। लेकिन पढने वालों की संख्या 100 से अधिक होगा। बाकि लोग, देश दुनिया के समाचार चाय की दूकान से चर्चा के माध्यम से समाज के लोगों में पहुँच जाता है। कुछ लोग रेडियो और टीवी के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर लेते है। इसलिए ग्रामीण समाज में चाय की दूकान सूचना का बड़ा माध्यम होता है।
दीप की तरह सदा मुस्कुराएँ।
भारतीय संस्कृति के अनमोल रत्नों में से एक है दीपावली का झिलमिला पर्व। एक ऐसा पर्व, जो हर मन के क्यारी में खुशियों के दिपदिपाते फुल खिलता है। एक ऐसा पर्व जो हर अमीर-गरीब को अवसर देता है स्वंय को अभिव्यक्त करने का। यह त्यौहार ना सिर्फ सांकृतिक या पोराणिक रूप से बल्कि कलात्मक और सृजनात्मक रूप से भी मन की भावाभिव्यक्तियों के प्रभावित होने का अवसर देता है। शिक्षक दिवस की शुभकामनायें।
शिक्षक सभी के जीवन का एक महतवपूर्ण हिस्सा होता है। जो छात्रों के प्रारंभिक शिक्षा में एक प्रकाश के रूप में योगदान देता है। जिसके सहारे छात्र अपना पहला कदम बढाता है। अपने समाज में एक जगह बनाता है। समाज उसका स्वागत भी करने लगता है। और समाज उसके विचार पर अमल करना शुरू कर देता है। छात्र सामाजिक प्रेरणा के साथ आगे बढ़ता जाता है।